सोच नई राह नया !
मेरा पहला कदम ब्लॉग में आपका स्वागत है
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- सुरुआत सफलता की पहली सीढ़ी है
- आप खुद अपनी तक़दीर बदल सकते हो
- आप वही बनते जाते हो जो आपकी सोच बनती है और सोच हमारी कैसे होनी चाहिए वो आपके उपर है

मैंने अपनी सोच से एक कदम चलना सिखा जब छोटे थे तब हमें पता नहीं था की चलना कैसे है
और हम हर बार गिर जाते हमें पता भी नहीं होता है की चलना भी होता है की नहीं और फिर ऐसी करते
करते गिरते थे और हमें गिरना अच्छा लगता था हम हँसते थे दर्द क्या होता है ये भी पता नहीं होता था
जब गिर जाते पर जैसे जैसे बड़े होते गए और इस दुनिया की तौर तरीके से समझना सिखा
फिर क्या उसमे हमें यह भी सिख लिया की रूकावटे को सिख लिए और वही आज हमारी नन्ही कदम अब रुक जा रहे है जब पता नहीं रहता तो वो कर लेते और
मिल जाता और अच्छा भी लगता पर आज ऐसा क्या बात है या ऐसी क्या चीज़ है जो कुछ करने से पहले रुक जाती है
डर आ जाती है ऐसा नहीं था हमारा बचपन एक खुली असमान की तरह साफ था और जैसे बड़े होते
गए उन साफ खुली दुनिया के असमान में बादल आना सुरु हो जाता है और धुंधला धुंधला दिखाई देने लगा
आज हमारी सोच ने ही सब चीजो को पाने के लिए प्रेरित और चाहा और वही कुछ सोच से
पीछे या रुक जाता है और कहते है की कैसे करे अब इस संसार में सब ठीक हो रहा है कोई भी अपनी तरीके से गलत नहीं है हवाए है पर वह अपनी दिशा जानती है
पर आज इन सोच ने इंसानों की कदम पर बेडिया पड़ गयी है चलना चाहते है पर रुक जा रहा है मनो किसी ने जंजीरों से बांध दिया हो और वो जंजीर छूटती ही नही पर ये जंजीर बांधा किसने जंजीर को और दुसरे ने नहीं
बल्कि वो जंजीर हमारी खुद की सोच ने बनायीं और खुद बंध गए है हम अपनी चलने वाली पैर को बांध दिए है
आज चाह कर भी हम उन सब बंधन से मुक्त नही हो पा रहे है पर आज मै चाहता हु हमारे पास वक़्त कम है इसलिए हमें अब चलना है आगे बढ़ाना है ये जो हमारी पहली कदम है वो एक नई राह हो और अपनी नई सोच हो और फिर देखो कितनी आगे और कितना ऊपर उड़ेगे
क्यों ना आज ऐसा कुछ करे जिससे की हमारी बंधी जंजीर पैर की छुट जाये और फिर से चलना सुरु करे
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